मनोभ्रंश रोग (डिमेंशिया) का रोग निदान (Disease diagnosis of dementia) || Disease diagnosis of dementia || Due to Disease and Disease || Rog Or Rog Ke Karan - Rclipse Blog

मनोभ्रंश रोग (डिमेंशिया) का रोग निदान (Disease diagnosis of dementia) || Disease diagnosis of dementia || Due to Disease and Disease || Rog Or Rog Ke Karan


मनोभ्रंश रोग (डिमेंशिया) का रोग निदान

यह सहायता पत्र डिमेंशिया के प्रारम्भिक लक्षणों, इसका रोगनिदान करने के तरीकों और शुरूआती तथा सही रोगनिदान करने की महत्ता के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

डिमेंशिया के प्रारम्भिक लक्षण कौन से हैं?

क्योंकि वे रोग जिनसे डिमेंशिया होता है, वे धीरे-धीरे विकसित होते हैं, इसलिए प्रारम्भिक लक्षण बहुत सूक्ष्म हो सकते हैं और हो सकता है कि ये तुरंत स्पष्ट न हों। प्रारम्भिक लक्षण डिमेंशिया के प्रकार पर भी निर्भर करते हैं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक अलग-अलग हो सकते हैं।

सामान्य प्रारम्भिक लक्षणों में शामिल हैं:
  • स्मरण-शक्ति से सम्बन्धित समस्याएँ, विशेषकर हाल ही की घटनाओं को याद रखना
  • व्याकु लता में वृद्धि
  • ध्यान लगाने में कमी होना
  • व्यक्तित्व या आचरण संबंधी बदलाव
  • उदासीनता और प्रत्याहार (विदड्राल) या अवसाद (डिप्रेशन)
  • दैनिक कार्यों को करने की क्षमता में कमी
कभी-कभी लोग इस बात को पहचानने में असफल रहते हैं कि ये लक्षण यह दर्शाते हैं कि कु छ सही नहीं है। वे गलती से यह मान लेते हैं कि ऐसा व्यवहार बूढ़े होने पर होना आम है, या लक्षण इतनी धीरे-धीरे विकसित होते हैं कि इनकी तरफ ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार लोग यह जानते हुए भी कि कु छ गलत है, उसपर कु छ कार्यवाही करने से हिचकिचा सकते हैं।

लक्षणों का अनुभव करने वाले व्यक्ति के लिए, मस्तिष्क के भीतर इन बदलावों के प्रकार का यह अर्थ हो सकता है कि व्यक्ति यह पहचानने में असक्षम है कि बदलाव हो रहे हैं।


चेतावनी संकेत

यह डिमेंशिया के आम लक्षणों की जाँच-सूची है। इस सूची का ध्यान से अध्ययन करें तथा जो लक्षण मौजूद हैं, उन पर सही का निशान लगायें। यदि आप सही के बहुत से निशान लगाते हैं, तो संपूर्ण निरीक्षण के लिए डॉक्टर से संपर्क करे

स्मरण-शक्ति का कम हो जाना जो रोज़मर्रा के कार्यों को प्रभावित करता है
कभी-कभी अपॉइंटमेंटों को भूल जाना और फिर बाद में उनकी याद आना आम है। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अधिक बार चीज़ें भूल जाता है या फिर उन्हें बिल्कुल ही याद नहीं रखता।

सामान्य कार्यों को करने में कठिनाई
लोग समय-समय पर विचलित महसूस कर सकते हैं तथा भोजन का कोई भाग परोसना भूल सकते हैं। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को भोजन बनाने के सभी कार्यों में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

समय और स्थान को लेकर भटकाव
डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को किसी परिचित स्थान तक पहुँचने में परेशानी हो सकती है, अथवा वह इस बात को लेकर व्याकुल महसूस कर सकते हैं कि वह कहाँ हैं, या हो सकता है कि वह ऐसा सोचें कि वह अपने जीवन के किसी पुराने समय मे हैं।

भाषा संबंधी समस्याएँ
वैसे तो हर किसी कि कभी न कभी उचित शब्द ढूँढने में कठिनाई होती है, परन्तु डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति साधारण शब्दों या वैकल्पिक अनुपयुक्त शब्दों को भूल सकता है, जिससे उनकी बात समझना कठिन हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को भी दूसरों की बात समझने में कठिनाई आ सकती है।

भावात्मक सोच संबंधी कठिनाईयाँ
हर किसी के लिए अपने पैसों का प्रबंध करना कठिन हो सकता है, पर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को यह जानने में मुश्किल हो सकती हैं कि संख्याओं का क्या अर्थ है और इनका क्या उपयोग है।

गलत निर्णय लेना या निर्णय लेने की क्षमता में कमी
कई गतिविधियों में अच्छा निर्णय लेने की क्षमता का होना ज़रूरी होता है। जब डिमेंशिया के कारण इस क्षमता पर असर पड़ता है, तो हो सकता है कि व्यक्ति को उचित निर्णय लेने में परेशानी आए, जैसे कि सर्दियों के मौसम में कौन से कपड़े पहने जाएँ।

स्थानिक कौशल संबंधी समस्याएँ
डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को कार चलाते हुए दूरी या दिशा के बारे में निर्णय लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

वस्तुओं को गलत स्थान पर रखने की समस्याएँ
कोई भी व्यक्ति कु छ देर के लिए अपना पर्स या चाबियाँ गलत स्थान पर रख सकता है। हो सकता है कि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अक्सर चीज़ों को उनके सही स्थान पर न रखे।

स्वभाव, व्यक्तित्व या व्यवहार में बदलाव
हर कोई समय-समय पर उदास या चिड़चिड़ा हो सकता है। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के स्वभाव में बिना किसी कारण तेजी से बदलाव आ सकते हैं। हो सकता है कि वह व्याकु ल, संदेही या चीज़ों से मुँह मोड़ने जैसे स्वभाव के प्रतीत हों। कु छ लोग कम संकोची या अधिक मिलनसार बन सकते हैं।

पहल करने में कमी
कुछ गतिविधियाँ बार-बार करके उनसे उब जाना साधारण बात है। परन्तु डिमेंशिया के कारण रोगियों की उन गतिविधियों में रूचि समाप्त हो सकती है जिन्हें करने में पहले उन्हें मज़ा आता था। 

हो सकता है कि यह डिमेंशिया न हो

याद रखें कि बहुत सी परिस्थितियों के लक्षण डिमेंशिया से मिलते- जुलते हो सकते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में यह न समझें कि किसी को डिमेंशिया है क्योंकि उनमें कु छ लक्षण मौजूद हैं। स्ट्रोक, अवसाद, शराब की लत, संक्रमण, हॉर्मोन संबंधी विकार, पौष्टिक तत्वों की कमी व मस्तिष्क ट्यूमर भी डिमेंशिया जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकते हैं। इनमें से कई परिस्थितियों का इलाज किया जा सकता है।

उचित रोग-निदान आवश्यक है

शुरू में ही किसी डॉक्टर से सलाह लेना अत्यावश्यक है। के वल डॉक्टर ही डिमेंशिया का रोग-निदान कर सकता है। सम्पूर्णचिकित्सीय एवं मनोवैज्ञानिक जाँच ही इलाज करने योग्य परिस्थितियों का पता लगा सकती है तथा यह सुनिश्चित कर सकती है कि इसका इलाज सही ढंग से होगा अथवा इससे डिमेंशिया से ग्रस्त होने की पुष्टि हो सकती है।

जाँच में निम्नलिखित शामिल हो सकता है:
  • मेडिकल हिस्ट्री (पृष्ठभूमि) – डॉक्टर पुराने और वर्तमान चिकित्सीय समस्याओं, पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री, सेवन की जाने वाली किन्हीं दवाईयों, और स्मरण-शक्ति, सोच-विचार या व्यवहार से सम्बन्धित ऐसी समस्याओं के बारे में पूछेगा जिनसे चिंताएँ हो रही हों। हो सकता है कि डॉक्टर परिवार के किसी करीबी सदस्य से बात करना चाहे जो संपूर्ण आवश्यक जानकारी प्रदान कर सकता हो।
  • शारीरिक जाँच – इसमें समझबूझ और गतिशीलता संबंधी जाँच और साथ ही हृदय और फे फडों के काम करने से सम्बन्धित जाँच शामिल हो सकती है ताकि किन्हीं अन्य समस्याओं के न होने की पुष्टि की जा सके ।
  • प्रयोगशाला संबंधी जाँच – इसमें भिन्न प्रकार की रक्त और मूत्र जाँच शामिल होगी ताकि यह पहचान की जा सके कि क्या लक्षण किसी रोग के कारण तो नहीं हैं। कु छ मामलों में, जाँच के लिए रीड़ की हड्डी के द्रव का थोड़ा नमूना भी लिया जा सकता है।
  • तंत्रिका मनोविज्ञान या संज्ञानात्मक जाँच – स्मरण-शक्ति, भाषा, ध्यान लगाना और समस्या का समाधान करने सहित सोच-विचार करने की योग्यताओं का आंकलन करने के लिए अलग-अलग प्रकार की जाँच का प्रयोग किया जाता है। इससे समस्या के विशिष्ट भागों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिससे अंतर्निहित कारण या डिमेंशिया के प्रकार की पहचान करने में मदद मिलती है।
  • मस्तिष्क की तस्वीर लेना – कु छ विशेष प्रकार के स्कैन होते हैं जो मस्तिष्क की संरचना को देखते हैं और इनका प्रयोग यह पुष्टि करने के लिए किया जाता है कि लक्षण मस्तिष्क में ब्रेन ट्यूमर या ब्रेन क्लोट के कारण तो नहीं हैं और इनका प्रयोग मस्तिष्क के टिशु के नष्ट होने के पैटर्न का पता लगाने के लिए भी किया जाता है जो डिमेंशिया के अलग-अलग प्रकारों के बीच अंतर बता सकते हैं। अन्य स्कैन यह बताते हैं कि मस्तिष्क के कु छ हिस्से कितने सक्रिय हैं और ये डिमेंशिया के प्रकार में अंतर बताने में भी सहायक होते हैं।
  • मनोरोग आंकलन – अवसाद जैसे उपचार-योग्य विकारों की पहचान करने के लिए और दुष्चिन्ता या भ्रम जैसे किन्हीं मनोरोग लक्षणों का प्रबंध करने के लिए जो डिमेंशिया के साथ हो सकते है
शुरूआत कहाँ से करें
  • शुरूआत करने का सबसे उत्तम तरीका व्यक्ति के डॉक्टर से सलाह लेना है। लक्षणों पर गौर करने तथा स्क्रीनिंग जाँच के आदेश देने के बाद डॉक्टर प्राथमिक रोग-निदान का प्रस्ताव दे सकता है और आदर्श तौर पर व्यक्ति को तंत्रिता विज्ञानी (न्यूरोलोजिस्ट), वृद्धावस्था रोग विशेषज्ञ (जेरिट्रिशियन) या मनोरोग चिकित्सक जैसे चिकित्सा विशेषज्ञ के पास भेज सकता है।
  • कु छ लोग डॉक्टर के पास जाने के विचार का प्रतिरोध कर सकते हैं। कभी-कभी लोग इस बात का अहसास नहीं करते हैं कि उनके साथ कुछ गलत है क्योंकि डिमेंशिया के साथ मस्तिष्क में होने वाले बदलाव किसी व्यक्ति द्वारा उसकी स्वयं की स्मरण संबंधी समस्याओं को पहचानने या समझने की क्षमता में बाधा डालते हैं। दूसरे लोग, जिन्हें अपनी परिस्थिति की समझ हो, वे अपने भय की पुष्टि हो जाने के कारण डरे हुए हो सकते हैं। इस समस्या को दूर करने का सबसे उत्तम तरीकों में से एक यह है कि आप किसी अन्य बहाने से डॉक्टर के पास जाएँ। शायद रक्त चाप या किसी दीर्घावधि की समस्या या दवाई की समीक्षा का बहाना लेकर। एक अन्य तरीका यह है कि इस बात का सुझाव दें कि आप दोनों की शारीरिक जाँच करवाने का समय आ गया है। इस समय शांत एवं ध्यान रखने वाला रवैया व्यक्ति की चिंताओं व उसके भय पर काबू पाने में सहायता कर सकता है।